भारत बंद 

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swati gupta
भारत बंद का कैसा महाजाल,
कर देता है जनता को बेहाल,
माँगे पूरी मनवाने की खातिर,
कुछ लोग करते है हड़ताल,
एक दिन भारत बंद होने से,
अर्थव्यवस्था का हो बुरा हाल,
सारे कामकाज ठप्प पड़ जाते,
दैनिक मजदूरों के होते फटेहाल,
बड़े लोग बजाते चैन की बंशी,
आम आदमी ठन ठन गोपाल,
परिणाम इसका बुरा ही होता,
स्वार्थी लोगों की ये षड्यंत्र चाल,
कहीं हो जाते दंगे,और आगजनी,
कहीं बंद रूप ले लेता विकराल,
आँखे खोलो,सुधर जाओ अब,
बुद्धि का करो सही इस्तेमाल,
शांतिपूर्ण तरीके से काम करो,
देशप्रगति को न खतरे में डाल,
आंतरिक कलह के कारण कहीं,
अपने भारत में न आ जाये भूचाल।।
नाम- डॉ स्वाति गुप्ता
साहित्यिक उपनाम- डॉ स्वाति गुप्ता
शिक्षा- पी एच डी(अर्थशास्त्र)
कार्यक्षेत्र- गृहिणी
विधा- काव्य स्वतंत्र लेखन
प्रकाशन- सांझा संकलन (तेरे मेरे शब्द)
सम्मान-  काव्य सम्पर्क सम्मान
लेखन का उद्देश्य- वर्तमान परिस्थितियों,समस्याओं और उनके विभिन्न पहलुओं को काव्य के माध्यम से पाठकों को जाग्रत करना।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।