भारत बंदः नेताओं की करतूतें

Read Time3Seconds

भारत बंदः नेताओं की करतूतें

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक/लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं।

विरोधी दलों द्वारा घोषित भारत-बंद को विफल तो होना ही था। इसके कई कारण हैं। एक तो आम आदमी आज भी यह मानता है कि मोदी ने यह नोटबंदी देश के भले के लिए की है। वह परेशानियों से काफी नाराज है लेकिन फिर भी वह उसे बर्दाश्त कर रहा है। दूसरा, लोग बैंक की कतारों में लगे या भारत बंद में शामिल हों? शनिवार-इतिवार को बैंकों की छुट्टी थी। सोमवार को उन पर भीड़ लगनी ही थी। विरोधी नेताओं को इसका अंदाज नहीं रहा होगा। दिल्ली में विरोधियों की सरकार है लेकिन दिल्ली में बंद का कोई असर नहीं दिखा। तीसरा, दुकानदारों और मजदूरों के लिए यह बंद ‘गरीबी में आटा गीला’ जैसी स्थिति पैदा कर रहा था। बंद करेंगे तो खाएंगे क्या? चौथा, विरोधी दलों में ही बंद को लेकर एका नहीं था। विभ्रम था। जिन नेताओं का अपने इलाके में कुछ असर है, वहां भी बंद नहीं हुआ पर प्रदर्शन जरुर हुए लेकिन ऐसे प्रदर्शन तो वे किसी भी बहाने से करवा सकते हैं।

इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार मौज करने लगे। जैसे उसने एक नकली जन-सर्वेक्षण करवा कर नोटबंदी को ठीक सिद्ध करने की कोशिश की। उसकी मजाक बन गई। बदहवास होने पर सरकारें इसी तरह की हरकतें करती हैं लेकिन संतोष की बात यही है कि यह सरकार बदहवास होने के बावजूद होशो-हवास में है। इस सरकार में कुछ ऐसे मंत्री हैं, जो अपने आप को सर्वज्ञ नहीं समझते और उनमें जरुरी लचीलापन भी है। वे ऊपर से टपके हुए नेता नहीं हैं। वे जनता से जुड़े हुए लोग हैं। वे रोज-रोज रचनात्मक सुझाव दे रहे हैं ताकि कीचड़ में फंसा हाथी किसी तरह बाहर निकल सके।

आज संसद में आया, नया आयकर संशोधन विधेयक इसी तरह की एक पहल है। इस तरह की पहल करने की बात मैंने तीन दिन पहले दोहराई थी। उसे मैंने 8-9 नवंबर को भी सुझाया था। इस पहल के बावजूद काला धन खत्म होने वाला नहीं है। यह सिर्फ अल्पकालिक राहत है। यह राहत उस भयंकर धक्के का इलाज कैसे करेगी, जो अर्थव्यवस्था को रोज लग रहा है? सफेद धन की ही बधिया रोज बैठ रही है।

राष्ट्रीय संकट में फंसे इस देश की संसद का बर्ताव भी अजीब है। न तो सत्तापक्ष किसी जिम्मेदारी का परिचय दे रहा है और न ही विपक्ष। यदि बड़बोले प्रधानमंत्री ने दुम दबा रखी है तो विपक्ष भी डंडे बजाने के अलावा क्या कर रहा है? यह ठीक है कि विपक्ष जनता के दुख-दर्द को जोरों से उठा रहा है लेकिन वह ऐसे कोई ठोस सुझाव नहीं रख रहा है, जिससे जनता को जल्दी से जल्दी और ज्यादा से ज्यादा राहत मिले। काले धन, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध नेता स्वयं अपने आचरण से जनता को कोई प्रेरणा नहीं दे रहे। सरकार न तो नेताओं के घरों पर छापे मारने की हिम्मत कर रही है और न ही नेता लोग अपना काला धन खुले-आम उजागर कर रहे हैं। काले धन और भ्रष्टाचार के मूल स्त्रोत हमारे नेतागण हैं। वे एक-दूसरे की टांग-खिंचाई करते हैं ताकि उनकी करतूत पर पर्दा पड़ा रहे।

लेखक परिचय: डॉ. वेदप्रताप वैदिक हिन्दी के वरिष्ट पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक, पटु वक्ता एवं हिन्दी प्रेमी हैं। उनका जन्म एवं आरम्भिक शिक्षा मध्य प्रदेश के इन्दौर नगर में हुई। हिन्दी को भारत और विश्व मंच पर स्थापित करने के की दिशा में सदा प्रयत्नशील रहते हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

एफसीआरए के बहाने 25 एनजीओ पर तलवार

Tue Nov 29 , 2016
एफसीआरए के बहाने 25 एनजीओ पर तलवार डॉ प्रकाश हिन्दुस्तानी यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक/लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं।  जाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन सहित […]
prakashhindustani

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।