बुरी आदत पर नियंत्रण

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madhuri jain soni
जो आदत हमारे इर्द-गिर्द के वातावरण में पनपती है,उसमें कुछ अच्छी होती है-कुछ बुरी होती है। कुछ हमारे जीवन का उत्कर्ष करती है तो कुछ हमारी बर्बादी का मूल कारण बनती है। अगर आदत अच्छी है तो उसे पुष्ट कीजिए,और अगर बुरी है तो उससे दूर रहिए। अपनी आदत के प्रति जागरूक रहें। अच्छी आदत कैसे बनती है,या अच्छी आदत कैसे डाली जाए,इस पर मुनिश्री कहते हैं कि,मनुष्य के इर्द-गिर्द का परिवेश ही उसकी आदत बन जाती है। यदि हम किसी मनुष्य की प्रवृत्ति में खिंचाव या आकर्षण महसूस करते हैं, या हम किसी कार्य के प्रति आकर्षण महसूस करते हैं तो यह एक प्रकार का नशा है। हम उसके आदि बन जाते हैं तो वो आदत हमारी दिनचर्या से जुड़ जाती है। हमारा आकर्षण जैसे हमें अच्छी चीजों की ओर खींचता है। वैसे ही बुरी चीजों की ओर भी खिचांव उत्पन करता है।
आदत का सबसे बड़ा प्रभाव-
विशालकाय हाथी एक रस्से से बंधा था। बंधन का रस्सा साधारण था। भीमकाय हाथी के पैर में साधारण रस्सा। एक आदमी ने देखा तो महावत को कहा,-आप तो बहुत बड़ा खतरा पाल रहे हैं, यह हाथी कभी भी उपद्रव मचा देगा,और यह रस्सा इतना मजबूत नहीं। हाथी तो इसे आराम से तोड़ सकता है। महावत बोला-निश्चिंत रहिए, ऐसा कुछ नहीं होगा। जब यह हाथी छोटा था,तब मैं इसको इसी रस्से से बांधता था। जब छोटेपन में ये रस्से को तोड़ने की कोशिश करता तो टूट नहीं पाता था,फिर कोशिश करता,फिर नहीं टूट पाया। बार-बार कोशिश के बाद अब उसके मन में गहरे तक ये बात बैठी है कि, यह रस्सा टूट नहीं सकता है।
आदमी की भी यही स्थिति है,जो आदत उसके गहन मन में है, वो उस आदत का गुलाम बन जाता है। आदत की परिणिति से अपने-आपको बाहर निकालना बहुत जरुरी है। अपनी आदतों पर रोक लगाओ,नियन्त्रण रखो। इसके लिए मजबूत बनो। अपनी इच्छा शक्ति को और संकल्प शक्ति को मजबूत बनाओ।जिसके पास आत्मशक्ति है,उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
आदतों को अपना मालिक मत बनाओ, और न आप उसके गुलाम बनो। आत्म शक्ति के बल पर आप संकल्प लेकर बुरी प्रवृत्ति से दूर रह सकते हैं,इसके लिए कोशिश कीजिए,सुधार कीजिए,अपनी बुराई स्वयं जीतें और साथ ही निपुण भी बनिए।आचार्य श्री कहते हैं-अपने जीवन को उत्तम बनाने के लिए उसे सही दिशा में मोड़िए। अच्छी संगति कीजिए,जैसी संगत वैसी रंगत। सजग रहिए। किसी उच्च आदर्श व्यक्ति को अपने हृदय में प्रतिस्थापित कीजिए। जीवन में बदलाव के लिए बुरी आदतों पर नियंत्रण जरुरी है।
                                                             #माधुरी जैन सोनी
परिचय : माधुरी जैन सोनी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है।जन्मतिथि-२९ मई १९७६ और जन्म स्थान-इंदौर ही है। एम.काम. तक शिक्षित माधुरी जैन का स्वयं का व्यवसाय है। आप सामाजिक क्षेत्र में संस्था लायनेस से जुड़ी हैं तो लेखन तथा खेलकूद में भी सक्रियता है। आपने लायनेस सेवा सम्मान पाया है,तो तैराकी में भी उपलब्धियाँ हासिल की है। लेखन का उद्देश्य रुचि है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।