बिस्लेरी को भेजा संदेश,हिंदी अपनाई

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m l gupta
मुंबई |
`बिक्री बढ़ाने के लिए बिस्लेरी ने भारतीय भाषाओं को अपनाया।
पता नहीं,दूसरी कंपनियों को यह समझ में आया कि नहीं आया`ll
बिस्लेरी कंपनी की इस समझ और ग्राहक के सम्मान के लिए उन्हें धन्यवाद तो दिया जाना चाहिएl उन्हें अपनी भावनाओं से अवगत करवाएँ।
विपणन(मार्केटिंग) के लिए भारतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाने के लिए प्रयास करें। इस संबंध में निजी स्तर पर,कंपनियों तक ग्राहकों की बात पहुंचाने तथा उन्हें प्रेरित करने के संबंध में आपके सुझाव,विचार अवश्य भेजिएl वैश्विक हिंदी सम्मेलन के समूह व्यवस्थापक एम.एल.गुप्ता ने कम्पनी को एक ट्विट से इसके लिए अनुरोध किया था,जिस पर यह बदलाव किया गया हैl
(साभार-वैश्विक हिंदी सम्मेलन,मुंबई)

                #डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।