बाल अभिनेत्री वान्या सिंह :- छोटी सी उम्र में बड़ी उपलब्धियां

Read Time1Second
IMG-20190529-WA0226
    उम्र से कोई बड़ा नहीं होता। यदि आपकी सोच बड़ी हो और लक्ष्य लेकर आत्मविश्वास से आप आगे बढोगे तो सफलता की राह में कोई बाधक नहीं बन सकता। ऐसी ही कहानी है बाल अभिनेत्री वान्या सिंह की। केवल 13 वर्ष की वान्या ने जो करिश्मा करा वह अकल्पनीय अदभुत है। दिल्ली के द्वारका स्थित विश्व भारती पब्लिक स्कूल में कक्षा नवीं की स्टूडेंट है वान्या। वह कोरियोग्राफर बनने का सपना देखा करती। आज वह अभिनय डांसिंग  व मॉडलिंग में बड़ा नाम है। अब वो ऐसे बच्चों को शिक्षित करने में लगी है जिनके पास कला तो है लेकिन उनका मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं होता है। ऐसी प्रतिभाओं की खोज कर उन्हें डांस सिखाती है वान्या। 30 बच्चों को जो कला में माहिर है उन्हें निशुल्क नृत्य की शिक्षा दे रही है। वान्या वर्तमान में कक्षा 9 में पढ़ रही है। वह पढ़ाई के साथ साथ कोरियोग्राफर बनना चाहती है और ऐसे बच्चों को आगे बढ़ाना चाहती है जिन्हें कभी आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिला। मंच नहीं मिला हो। वह ऐसे बच्चों को मंच तक पहुंचाती है। ताकि वे अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। आर्थिक समस्या के कारण कई बच्चे अपनी प्रतिभा में निखार नहीं ला पाते। और कई बच्चे ऐसे भी होते है जिन्हें मार्गदर्शन देने वाले नहीं मिलते। उनकी प्रतिभा कैसे बाहर आये। ऐसे बच्चों के लिए वान्या ने  घर पर ही डांस अकेडमी खोल दी। उसका नाम नव्या सृजना रखा। जहाँ संध्या काल मे वान्या दो घण्टे डांस सिखाती है।
  वान्या ने अल्प उम्र में अपार उपलब्धियां प्राप्त की। वान्या की डांस में रुचि रही। उन्होंने 3 साल की आयु में कथक सीखा। 2009 में डांस इंडिया डांस रियलिटी शो व लिटिल चेम्प  में वान्या ने धमाकेदार आगाज़ किया। और वान्या के सपनों के पंख लग गए। इसके बाद वे लघुफिल्म व विज्ञापनों में नज़र आई। विज्ञापन फिल्मों में खूब काम किया। फिल्मों में अभिनय किया। मॉडलिंग में भी बेहतरीन कार्य किया। वान्या अब तक 250 पुरस्कार जीत चुकी है।
  मिस जूनियर इंडिया 2017 प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ था।
  भारत गौरव तेजस्वनी अवार्ड सोशल मीडिया अवार्ड प्राइड ऑफ दिल्ली अवार्ड और किशोरी अवार्ड  एशियन एक्ससीलेन्स  अवार्ड  कंट्री प्राइड आवर्ड वीनर लता मंगेशकर अवार्ड  जैसे सम्मानों से वान्या को सम्मानित किया जा चुका है।
  वान्या दीपिका पादुकोण को अपना आदर्श मानती है। अपनी उपलब्धियों का श्रेय वे उनकी माँ को देती है।
  वान्या के पिताजी ने बताया कि वान्या ने साढ़े तीन साल की उम्र में ही दिल्ली के हिन्दी भवन में पहला एकल नृत्य स्टेज पर किया था। आज वह दर्जनों स्टेज शो कर चुकी है। दिल्ली से बाहर दूसरे प्रदेशों में वह 30 स्टेज शो कर चुकी है। अब तक 300 सर्टिफिकेट प्राप्त चुकी है वान्या। कथक डांसर के रूप में वान्या की अपनी पहचान है  लेकिन वह हर नृत्य में पारंगत है। हाल ही में रसियन बेले  भी सीखी है। कथक नृत्य में 4 साल का क्लास भी कर  चुकी है। फॅशन शो में शिरकत करना उसे अच्छा लगता है।
  वान्या ने एन डी टी वी  स्टार प्लस सहित कई टी वी चैनलों में काम किया। गली गली सिम सिम के 20 एपिसोड  पूरे हो चुके हैं। पोगो चेनल में वॉइस ओवर आर्टिस्ट राह चुकी है। अब तक 300 स्टेज शो कर चुकी है। टी वी वीडियो शूट करना प्रिंट शूट ऑनलाइन शूट कई ब्रांड के वान्या कर चुकी है। जो बच्चे स्कूल नहीं जाते उनगें शिक्षित करती है डांस सिखाती है।
  वान्या का संदेश है कि दिव्यांग बच्चों के लिए सबको आगे आना चाहिए। मैं चाहे कुछ भी बन जाऊं लेकिन दिव्यांगों के लिए काम करती रहूंगी। समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का मैं प्रयास करती रहूँगी। वे अपनी सफलता का श्रेय अपनी माताजी कंचन सिंह और पिताजी  रंजीत कुमार जी को देती है।इतनी छोटी सी उम्र में इतनी प्रतिभा बहुत कम मिलती है।
#राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
परिचय: राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ की जन्मतिथि-५ अगस्त १९७० तथा जन्म स्थान-ओसाव(जिला झालावाड़) है। आप राज्य राजस्थान के भवानीमंडी शहर में रहते हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है और पेशे से शिक्षक(सूलिया)हैं। विधा-गद्य व पद्य दोनों ही है। प्रकाशन में काव्य संकलन आपके नाम है तो,करीब ५० से अधिक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित किया जा चुका है। अन्य उपलब्धियों में नशा मुक्ति,जीवदया, पशु कल्याण पखवाड़ों का आयोजन, शाकाहार का प्रचार करने के साथ ही सैकड़ों लोगों को नशामुक्त किया है। आपकी कलम का उद्देश्य-देशसेवा,समाज सुधार तथा सरकारी योजनाओं का प्रचार करना है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अपने पराये

Sat Jun 1 , 2019
जब अपने हुए पराये किसका दोष कौन बताए। रुपयों की खनक अधिकार की धमक रौदते रिश्ते की खुश्बू स्वार्थ की बात समाये जब अपने हुए पराये…….. एक खून जज्बात एक क्यों लोग भटके जाते हैं तेरा मेरा कुछ नही पर क्यों सिक्के खनखनाते हैं प्रेम के सूत्र में पिरोये मोती […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।