फिर से नामकरण……….

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anupa harbola

“लता एक थाली में ज़रा चावल तो भर कर ला”, उसकी बुआ सास बोली।

“अभी लाती हूं”।

वो थाली में चावल भर कर लाती है…….

“ये लो बुआजी पर किस लिए चाहिए ये चावल आप को”।

“अरे! भूल गई क्या,बहू को नया नाम देना है”।

“ले मुन्ना लिख इसका नया नाम इसमें”, वो चावल भरी थाली लता के बेटे की तरफ सरका देती है।”

“मेरा नाम है ना आभा जोशी” लता की बहू धीमी आवाज़ में बोली।

“अरे, वो तो तेरा मायके का नाम है, आज से वो ख़तम ,आज जो तुझे नाम मिलेगा वह आज से तेरा नाम होगा “बुआ बोली।

“पर…”

“पर वर कुछ नहीं, सबका बदला जाता है,मेरा ,तेरी सास का और उसकी सास का, सभी को शादी के बाद नया नाम मिला” बुआ बोली।

“पर मेरे सर्टिफिकेट में मेरा नाम आभा जोशी  है” बहू ने बोला।

“एक एफेडेविट बन जायेगा, और हो गया नाम बदली”….बुआ ने कहा।

“पर…”

“फिर पर”, बुआ बोली।

“बुआ जी मैं नाम को आभा जोशी लोहनी कर लेती हूं ये भी तो नया नाम है”, बहू ने फिर कोशिश की ।

“नहीं तेरा नाम आज से काव्या लोहनी है, कमल के नाम से मिलता हुआ। क से कमल, क से काव्या देख, मैचिंग मैचिंग” बुआ बोली।

नई बहू का चेहरा देख कर सास जान जाती है कि आभा (नई बहू) खुश नहीं है।

“बुआ आज के समय में कोई नहीं बदलता है नाम, ये पुराने दिनों की बात है, जब औरते घर पर रहती थी,पर आज के समय में लड़कियां नौकरी करती हैं, कितनी परेशानी होती है नए नाम के चक्कर में ,कोई नहीं देता नया नाम बहू को अब” लता बोली।

“सही सीख दे रही है तू अपनी बहू को मेरी बात काट कर” गुस्से में बुआ बोली।

“अरे बुआजी, गुस्सा काहे हो रही हो, ज़माने की बात कर रही हूं मैं”।

“जो करना है करो “बोलकर बुआ पीछे सरक जाती है।

आभा  आँखों आँखों में अपनी सास को धन्यवाद बोलती है, दोनों सास बहू एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते हैं।

कमल चावल की थाली में “आभा जोशी “लिख देता है….

अनूपा हर्बोला

विद्यानगर(कर्नाटक)

 

 

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।