पावन धारा

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shashi mittal
कल -कल करती अविरल
जल की धारा…
पर्वत से झरती
पावन धारा…
पशु -पक्षियों की प्यास बुझाती ,
प्रकृति का सुंदर श्रृंगार करती !
स्वच्छ ,निर्मल ,निश्चछल ,चंचल ,
बहती जाती …
झाग बनाती जैसे दुग्ध धारा
कल कल…………….
आकुल -व्याकुल -सी हो रही ,
कोई काव्य रचने को मचल रही !
झरझर -कलकल -छलछल.स्वर
संगीत सुनाती प्यारा प्यारा
कल कल……….
कला व संस्कृति का संगम ,
विलक्षणता  भी  खूब  भरी..
शाश्वत -सी रागिनी…
रग -रग मे रस उड़ेल रही
संदेश सुनाती जग को सारा
कल कल…………..
जीवन है अनमोल ..
ये संदेश बिखेर रही !!
चंचल ,निश्चछल बहती..
पाषाणों से कभी ना डरती
कष्ट सहना सिखाती धारा
कल कल………..
       #शशि मित्तल
        सरगुजा (छत्तीसगढ़)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।