पलाश

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aditi rusiya
देखो फागुन आया फागुन आया
वन उपवन पर यौवन छाया
फूले टेसु देखो लाल लाल
सारा उपवन हुआ अंगारे सा लाल

पिय से मिलन की फिर प्रीत जगी
राधा की बाँछें भी खिल उठी
संग कान्हा के जो प्रीत लगी
रास रचाने फिर एक आस जगी

दहकने लगा बदन *पलास* सा
यौवन छाया दहकते अंगारों सा
चुनरी पे भी ख़ुमार छाया आज
सर सर सरके सर से आज

नटखट कान्हा के संग खेलन होरी
बैठी संग सखियों बावरी राधा गोरी
भर पिचकारी मारी कान्हा ने
रंग दी लाल चुनरिया कान्हा ने

सकुचाई सिमटी सी बैठी राधा रानी
लाज़ शरम के भई फिर पानी पानी
कान्हा के रंग रंगी राधिका
मले अबीर गुलाल कान्हा को राधिका

निखर गया तन श्याम रंग रंग के
तन मन वारा श्याम रंग रंग के
चुनरी रंग ली श्याम के रंग रंग के
लोक लाज छोड़ी वंशी धुन सुनके

हुआ पलास को आज घमंड है
रंगा जो उसने राधा का अंग है
सूरज की चमक भी आज कम है
क्योंकि दहक रहा आज टेसु का यौवन है

#अदिति रूसिया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।