*पर्यावरण पच्चीसी* 

Read Time5Seconds

babulal sharma

1.🌜🌛
पृथ्वी पर चहुँ ओर है,सबहि आवरण सोय।
पर्यावरण कहत उसे, मीत सुनो सब  कोय।।
2.🌜🌛
क्षितिजलपावक है गगन,बहती साफ समीर।
पर्यावरण  वही  बनत, जीवन  और  शरीर।।
3.🌜🌛
पेड़ और वन बाग से , बिगड़े नहि ये साज।
शुद्ध रहे पर्यावरण, करलो सब अस काज।।
4.🌜🌛
खेत-खार  मैदान में , मन्दिर  पेड़  लगाव।
पर्यावरण सुधार कर,प्राण वायु सब पाव।।
5.🌜🌛
प्रिये पेड़  है पूत  सम , करलो रक्षण आज।
पर्यावरण बचाइ लौ, कर जंगल सिर ताज।।
6.🌜🌛
सिर के बदले पेड़ है , यही पुरानी  रीत।
पर्यावरण सुधार की,सुनो कहानी मीत।।
7.🌜🌛
बरगद है सौ पूत सम,लम्बी आयु जहान।
पर्यावरण जहाँ बसे , सच्चा साथी  मान।।
8.🌜🌛
पीपल विष्णु बसे जहाँ,प्राण पवन भरपूर।
पर्यावरण  बने  वहीं,  पावनता  का   नूर।।
9.🌜🌛
नीम निरोगी तन रखे,शत रोगी उपचार।
पर्यावरण समेत पशु,चारा वन आधार।।
10.🌜🌛
जीवन देती खेजड़ी,फल पत्ते वन छाँव।
पर्यावरणी संतुलन , रखती अंगद पाँव।।
11.🌜🌛
फल का राजा आम्र है,छाँया की भरमार।
पर्यावरण  सम्भलता, कोयल गाती डार।।
12.🌜🌛
वीर  बड़ा  बंबूल है, लकड़ी पात्  समूल।
पर्यावरण सहाय है,निज रक्षा हित शूल।।
13.🌜🌛
शीशम सुन्दर सागवां,गहरी शीतल छाँय।
प्रहरी बन बैठे यहाँ,सिंह कपि संग गाय।।
14.🌜🌛
जम्बू गुणकारी बने,मधु हारी  मय अंग।
खाँसी संग अजीर्ण में, पर्यावरणी संग।।
15.🌜🌛
सच्चेे मीत बनाइ के,वृक्ष लगाय अनेक।
पर्यावरण  सँवारना , भाव जगाएँ नेक।।
16.🌜🌛
पालन पोषण सब करो,मधुर भाव हरियाय।
एक  एक  पौधा  बने , पर्यावरण  सहाय।।
17.🌜🌛
यौवन छाँया वृक्ष दे , मीठे फल रस दार।
चिड़िया मैना कूक ते , पर्यावरण बहार।।
18.🌜🌛
सुन्दर नीड़,बसेर में , पंछी कलरव तान।
मिले प्राण वायू हमें, मुख में हो मुस्कान।।
19.🌜🌛
वृद्ध अवस्था  दौर में , सोच कहाँ है ठौर।
पर्यावरण बिना यहाँ,नहीं मीत तरु और।।
20.🌜🌛
मन के सारे भाव में,सुख-दुख पीड़ा तोल।
पर्यावरण सुधार कर,मन की आँखे खोल।।
21.🌜🌛
जिन बाहों में जान है,आज तुम्हारे साथ।
पौधा  बनता  पेड़ है , संग तुम्हारे  हाथ।।
22.🌜🌛
पौधा लाओ एक तुम,खेत मेड़ लग जाय।
आओ बन्धु  साथ में,  पर्यावरण  बचाँय।।
23.🌜🌛
गैस बुरी है कार्बन , अवश् प्रदूषण लाय।
पर्यावरण जहर घुले ,धूम मेघ बन आय।।
24.🌜🌛
धरा प्रदूषित  संग में,जल भी गन्दा होय।
पर्यावरण सन् शत्रुता ,रक्षा कर अब कोय।।
25.🌜🌛
स्वच्छ रखें जलस्रोत तो,मिलता जीवनदान।
दोहन ज्यादा ना  करो , पर्यावरण  सुजान।।

नाम- बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

म्हारा भागीरथ का भई : मालवी बोली के हीत में 

Mon Aug 6 , 2018
मालवी काव्य संग्रह “म्हारा भागीरथ  का भई “रचनाकार गौरीशंकर उपाध्याय “उदय “३० मालवी रचनाओं का संग्रह मन में भी मिठास घोलडेता है | मालवी बोली की तासीर का असर है | मीठी बोली ऐसी की मानों शहद घुली हो | बोलियों को बचाने में ये अंक महत्व पूर्ण भूमिका अदा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।