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naveen jain

स्नेह की धारा है वह, है वात्सल्य की मूर्ति ,
वीरुध वही,वन वही, कालिका की वो पूर्ति |
राष्ट्र,समाज और परिवार को वो समर्पित,
स्व पर,हित को करती प्राण भी अर्पित |
वाणी वही,गिरिजा वही,है दामिनी भी वह,
कल्पना वो,प्रतिभा वही है,कामिनी भी वह|
किरण है वह,है सुभद्रा,है महादेवी भी वह,
सृजक है वो समाज की,समाजसेवी भी वह|
है मदर टेरेसा,ऐनी बेसेन्ट,यशोदा भी वह,
है अनैतिक समर में संघर्षरत,योद्धा भी वह|
बोझ नहीं है,अबला नहीं,न द्वितीय है वह,
वह धरा पर देवी रूप,नारी अद्वितीय वह|
जननी वही,गृहिणी वही,नंदिनी भी है वह,
भगिनी वही,सती वही,संगिनी भी है वह|
बरछी वही,कलम वही,तलवार भी है वह,
कंचन वही,चाँदी वही,अलंकार भी है वह|
शस्त्र भी वह,शास्त्र भी वह,शक्ति भी है वह,
अस्त्र है वह,आस्था भी वह,भक्ति भी है वह|

                                                             #नवीन कुमार जैन

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