धरा से गगन तक

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ramesh
चलो हम सजाएं धरा से गगन तक,
खुशियाँ बिछाएं धरा से गगन तक।

रुकेंगे न अब हाथ मरु में सृजन तक,
बिखेरेंगे खुशबू धरा से गगन तक।

पढ़ा तुमने गीता कुरान और बाईबल,
पढ़ा हमने केवल धरा से गगन तक।

नफरत हमारी रगों में नहीं है,
पूजा सभी को है सर से चरण तक।

सन्देह तेरा मिटाने की जिद में,
दिये खोल मन के सभी आवरण तक।

प्रदूषण हवा में घुला इस तरह है,
धुआँ ही धुआँ है धरा से गगन तक।

अगर शीघ्रता से न रोका गया तो,
बिखर जाएगा विष खिलते चमन तक।

भरती सभी घाव बाहर के मरहम,
मगर नेह हरता है मन से जलन तक।

चलो भेद की गांठ मन से हटा दें,
बहे प्रेम ‘निर्झर’ धरा से गगन तक।

      #रमेश शर्मा ‘निर्झर’

 

परिचय  : रमेश शर्मा ‘निर्झर’ चांदामेटा निवासी हैं तथा बैंक आॅफ महाराष्ट्र परासिया में सेवारत हैं। गद्य व पद्य दोनों लेखन में रुचि है। वर्तमान में श्रीमद् भागवद्गीता का पद्यानुवाद राधेश्याम धुन में पूर्ण कर चुके हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।