धरती मेरे देश की

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pramod kumar

धरती मेरे देश की

धरती मेरे देश की क्या कमाल करती है

वीरों को दे जन्म खुद पर  ये अभिमान रखती है

बेशक खींच दी धरम की लकीरे इस पर

फिर भी राम रहीम में  ये अपनी  जान रखती है

आरक्षण की बेढियों में जकड़ी है इसकी काया

गीता  कुरान में  फिर भी   ये अपनी पहचान  रखती है

खुद की छाती फाड़ कर अन्न उपजाती है

भूखा न रहे इसका लाल  अनपूर्णा ये  अपना नाम रखती है

भाषा रंग रूप  हर कदम पर  इसके बदल जाते हैं

हिंदी में ही  फिर भी ये अपनी आवाज़ रखती है

जाति बना हो आधार  इसके  हर सफ़र का

मिटा हर भेद को “हर्ष” हिंदुस्तान ये अपना नाम रखती है

#प्रमोद कुमार हर्ष

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।