दिल को नही छू पाई रॉ

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edris
रोमियो अकबर वाल्टर
दिल तो नही छू पाई रॉ,
फ़िल्म समीक्षक इदरीस खत्री द्वरा,,,,
निर्देशक
रॉबी ग्रेवाल
अदाकार
जान अब्राहम, मोनी रॉय, जैकी श्रॉफ, सिकन्दर खैर, बोमन ईरानी, अलका अमीन
संगीत
अंकित तिवारी, सोहैल सेन, शब्बीर एहमद, राज आशू
पार्श्व ध्वनि
हनीफ शेख,
अवधि
139 मिनट
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दोस्तो देश मे टाइगर के बाद जासूसी फिल्मो पर खूब ताना बाना बुना जा रहा है पिछले साल राजी भी जासूसी फ़िल्म थी रॉ यानी रोमियो अकबर वाल्टर भी एक जासूसी फ़िल्म है जो कि सच्ची घटना पर आधारित प्रचारित की जा रही है
खैर फ़िल्म 1971 के भारत पाक की जंग के पहले की पृष्ठभूमि पर आधारित होकर भारत से पाकिस्तान स्थापित किये गए भारतीय जासूस रविन्द्र कौशिक के जीवन से प्रभावित बताई जा रही थी
मेरा इस पर एक सवाल है कि जब जासूस की गोपनीयता खत्म हो जाए तो वह जासूस कैसे रह जाएगा,मौत को गले लगाने के सिवा कोई चारा नही बचता उस जासूस के पास, और उन्हें वेसे ही ज़हनी और शारारिक तौर पर तैयार किया जाता है,,
फ़िल्म पर आते है
कहानी
1971 के आसपास की पृष्ठभूमि रखी गई है
कहानी अकबर(जान अब्राहम) से शुरू होती है जिस पर पाकिस्तानी खिफ़िया अधिकारी खुदाबक्श(सिकन्दर खैर) को शक है कि अकबर एक भारतीय जासूस है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है, यहां तक के उसकी उंगलियों के नाखून उखाड़ दिए गए है,
यहां से कहानी यादों के सफर पर निकलती है जिसमे रोमियो के अकबर तक का सफर पता चलता है,, रोमियो(जान) बैंक में काम करने वाला ईमानदार और बहादुर नोजवान है वह वही काम करने वाली सह कर्मी शृद्धा(मोनी रॉय) की मुहब्बत में है,, रोमियो अपनी माँ (अलका अमीन) के साथ रहता है, रोमियो के पिता ने देश के खतिर अपनी जान दी थी तो उसकी माँ ने देशभक्ति के ज़ज़्बे और जुनून से दूर अपने बेटे की परवरिश की है,
लेकिन एक दिन बैंक में डकैती होती है और रोमियो बहादुरी से लड़ता है,,यहां से उसकी जिंदगी में बदलाव आते है कि रोमियो को भारतीय खुफिया विभाग रॉ चीफ श्रीकांत रॉय(जैकी श्रॉफ) उसे बुलाते है और रॉ के जासूस बनने की पेशकश रखते है जिसमे रोमियों को पाकिस्तान जाकर अकबर मलिक बनकर पाकिस्तान से खुफिया जानकारियां भेजनी है उसके पाकिस्तान जाने से पहले मुकम्मल ट्रेनिंग दी जाती है और पाक भेजा जाता है जहां वह इज़हाक आफरीदी(अनिल जार्ज) का दिल जीतने में कामयाब हो जाता है साथ ही उसका विश्वास पात्र बन जाता है,
अब अकबर को भारत पाक के बदलीपुर में होने वाले हमले की खुफिया जानकारी भारत को भेजना है जिसमे एक पाकिस्तानी(रघुवीर यादव)उसकी मदद करता है,
यहाँ तक सब ठीक ठाक चल रहा था कि अचानक शृद्धा पाकिस्तान पहुच जाती है जिससे खुदाबख्श को एक सुराग मिलता है जिससे उसे अकबर पर शक हो जाता है,
वह उसे गिरफ्तार कर सच उगलवाना चाहता है,, लेकिन होता क्या है यह जानने के लिये   तो आपको रोमियो से अकबर की दास्तान जानने के फ़िल्म भी देखनी पड़ेगी
जासूसी विषय गहन शोध का विषय है रॉबी ग्रेवाल निर्देशक ने किया भी है जो कि फ़िल्म में साफ दिखता भी है
निर्देशक रॉबी इससे पहले फ़िल्म 2003 में फ़िल्म समय- मर्डर मिट्री सुष्मिता सेन के साथ  के अलावा mp3 मेरा पहला पहला प्यार, आलू चाट 2009 में बना चुके है,,कोई बड़ी सफलता तो हाथ नही है
फ़िल्म का पहले हाफ में सब कुछ स्थापित करने में निकाल दिया तो फ़िल्म थोड़ी नीरस लगती है, परंतु दूसरे हाफ में फ़िल्म लय पकड़ रफ्तार में आ जाती है,लेकिन अंत थोड़ा मायूस करता है,,,
जॉन से जिस एक्शन की उम्मीद की गई है फ़िल्म में वह पूरी नही होती
संगीत अच्छा बना है,
गाना जी लेन दें, मोहित चौहान ने बढ़िया गाया है जिसे बार बार सुन सकते है,
वंदे मातरम पर फ़िर एक और प्रयोग किया जो कि दिल को छू गया,,
जिसे सुरबद्ध और लिखा है शब्बीर एहमद ने,,
गाना  बुलैयां और अल्लाहू भीसुकून बख्श बने है,,
गानो में कोई भी गाना ऐसा नही है जिसे आप गुनगुना पाए केवल कर्णप्रिय है,,
 तपन तुषार बसु का फिल्मांकन बढ़िया है, खास बारिश वाले दृश्य अच्छे बन गए है,,
फ़िल्म का बजट 40 करोड़ है
जो कि आसानी से निकल जाएगा,,
फ़िल्म को देश भर में 2600 स्क्रीन्स मिली है साथ ही आई पी एल क्रिकेट घमासान चल रहा है तो शुरूआत फीकी रहने की उम्मीद ही जिसमे 4 से 7 करोड़ की शुरुआत हो सकती है,,,
अदाकारी पर बात करे तो जॉन मंज़ गए है अलग अलग किरदारों को बखूबी निभाया है, इस साल जान की  फिल्म आनी है बाटला हाउस जिसमे वह पुलिसवाले की भूमिका में होंगे
मोनी रॉय का काम न के बराबर ही है,
सिकन्दर खैर ने बढ़िया काम किया है वह जमते है किरदार में,
शेष अदाकार औसत रहे है
छोटे से किरदार में रघुवीर छाप छोड़ने में कामयाब रहे है,,
फ़िल्म को हमारी तरफ से
3 स्टार्स

#इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।