दिलरूबा

Read Time1Second
keshav
तुम मेरे साथ हो तो,
सांसे मेरी चलती हैं।
अगर तुम दूर हो तो,
जां मेरी निकलती है।
ये दुनिया अजायबघर है,
यहाँ सब आता-जाता है।
ओ मेरी दिलरुबा तुझसे,
जन्म-जन्मों का नाता है।
जां मेरे सपनों में न आना,
दिल की हकीकत हो तुम।
मुझे कभी भुला ना जाना,
हो मेरी सबकुछ तुम्ही तुम।
तुमसे जब नजरें मिली मेरी,
दिल में तस्वीर ही उतर गयी।
अब तो तुम्हें अपना बनाकर,
मेरी पूरी दुनिया बदल गयी।
क्यों दूर-दूर रहती हो मुझसे?
क्यों आती नही हो मेरे पास?
अब ओ मेरे जानेमन तेरे बिना,
मेरा दिल रहने लगा है उदास।
मैंने अपना दिल तुम्हे दिया है,
पास मेरे अब आ भी जाओ।
मेरे दिल में रहो-धड़कन में रहो,
मेरी आँखों में तुम समा जाओ।
मुझे अब और न तुम तड़पाओ,
तुम आ जाओ-तुम आ जाओ।।

         #केशव कुमार मिश्रा

परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

0 0

Arpan Jain

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

उलझन

Thu May 3 , 2018
जज्बात ए इश्क़ बयां करूँ कैसे, उनसे झुकी नज़रे मिलाऊं कैसे, मन में प्यार का समंदर भर रहा है हिलोरें, किश्ती को पार लगाऊं कैसे. जल रही है इश्क की शमा चोरी चोरी, फैला रही है सुनहरी रोशनी थोड़ी थोड़ी, नूर ए शमा को छुपाऊं कैसे, जज्बाते इश्क़ बयां करूँ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।