दहशतगर्दी

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kiran baranval
आये दिन दंगे की खबर सुन आत्मा कांप जाती है। हम किसके लिये  और क्यों आपस में  लड़ कट रहे हैं। काश कोई  मेरे सवाल का जवाब दे देता
ये कैसी दहशतगर्दी है यारों
फैला रहा कौन वैमनस्यता दिशा चारों
जात पात की चल रही क्यो लड़ाई
दुश्मन हो चला एक भाई का दूजा भाई
      राम हमारा रहीम तुम्हारा है
      क्यों नहीं समझते प्यारा देश ये हमारा है
      खून में नहीं है भिन्नता
       विचारों में  क्यों रखे हो विभिन्नता
ईश्वर अल्लाह के नाम पर क्यों लड़े जा रहे हो
मार काट कर क्यों  बेमौत मरे जा रहे हो
सबका है ये दुलारा चमन
पाले हो आपस में  बैर,भला आयेगा कैसे  अमन
   माँ कहो या अम्मी,भारत  हमारा है
   पूर्वजों ने खून की कीमत पर इन्हे संवारा है
आज़ादी के रण में ना जाने कितनों  ने गोली खाई है
जान की कीमत पर  हमें स्वतंत्रता दिलवाई है
   ना रहीम के ना राम के, रक्त बहाई हिन्दूस्तान के नाम के
   ना मुहर्रम मनाना था ना दिवाली मनानी थी
    ज़िद था उनका, बस हमें  आजादी पानी थी
उनके कुर्बानी को ना व्यर्थ करो
आपस में अल्लाह ईश्वर के नाम ना लडो।
#किरण बरनवाल
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Arpan Jain

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।