तू जितना आजमाएगा

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mahbub
निशानी बाप-दादा की जो गिरवी रखने जाएगा,
वो अपना आतिश-ए-लाचारगी में दिल जलाएगाl

पढ़े-लिखों का है ये शहर वापस लौट जा प्यारे,
यहाँ एहसास की बोली कोई न जान पाएगाl

वो आँखें बंद करके भी मेरे जजबात पढ़ लेगा,
मेरा कमअक्ल दिल कैसे हजारों गम छुपाएगाl

यहाँ अरमान भी लोगों के अकसर लूटे जाते हैं,
तू इस दुनिया में जीकर,सोच ले क्या और पाएगा।

नहीं डर आग का होता,नहीं जलने का सोने को,
निखरता ही मैं जाऊँगा तू जितना आजमाएगाl

हवा के दौर पर चलने लगा झोक-ए-सुखन मेरा,
निशाँ फिर बाद मेरे कौन इसका ढूंढ पाएगाl

चराग-ए-उम्र हूँ ‘महबूब’,बुझ के जल न पाउँगा,
नहीं हूँ ‘बल्ब’,के हर-रोज मुझको तू जलाएगाl 

#महबूब सोनालिया

परिचय : आपका निवास गुजरात के भावनगर में हैl आप लेखन में  `महबूब` उपनाम उपयोग करते हैंl आपको गजल लिखने का ज्यादा शौक हैl १९८७ में आपका जन्म हुआ हैl
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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।