तीस-पैंतीस

Read Time3Seconds

suresh sourabh

    ‘न तेल आए। न राशन लाए । न सब्जी लाए। अब बच्चे क्या खायेंगे।’
‘अरे भाग्यवान तुझे कैसे समझाऊं। आज मुख्यमंत्री आए थे। सारे शहर की सड़कें आम आदमी के लिए बंद थीं। सारे वाहन बंद थे।
‘फिर सारा दिन किया क्या।’
‘आटो खड़ा करके इंतजार करता रहा अब रास्ते खुले तब खुलें। आंखें पथरा गईं यही करते-करते तब शाम को रास्ते खुले। फिर जाम की झाम में यही तीस-पैंतीस पैदा हुए। ऊपर की जेब से निकाल कर पत्नी के हाथों पर रूपये धरते हुए।, “अब इन्हीं से कुछ मंगा लो। दिमाग खराब हो गया जाम में।”
‘जहर ही मंगा कर सब को खिला दो और क्या मिलेगा तीस-पैंतीस में। फिर चाहे कोई मंत्री मरे या मुख्यमंत्री ,शाम को पेट के लिए रोना तो न होगा।’
पति नम आंखों से शून्य में ताकने लगा और वे तुड़े मुडे़ तीस-पैंतीस लिए पत्नी बराबर रास्ता बंद करने वालो को कोसे जा रही थी।

सुरेश सौरभ 
लखीमपुर खीरी

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

तन

Mon Jul 16 , 2018
कंचन जैसी *काया* तेरी मदमस्त नशीली आँखे तेरी गुलाब की पंखुरी से लब हैं तेरे फूलों सा कोमल हृदय तेरा नाज़ुक कलि से हाथ तेरे नागिन सी बलखाती चाल तेरी यौवन दहकता अंगारों सा तेरा संभल संभल पग धरना धरा पर काँटे बिछे हैं ख़ूब राहों पर घूम रहे वहशी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।