तिरंगा और आज का युवा

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niraj tyagi
मेरे देश के युवा अब सही रास्तो को खो रहा है।
देख के युवाओं की ये हालत,तिरंगा रो रहा है।।
हर जगह देश का नक्शा अपने को एक भागती कन्या जैसा दिखा रहा है।
ऐसे अपमान भरे नजारे देख देख कर तिरंगा हमारा शरमा रहा है।।
लूट रही हर पल अस्मत हमारी बहु-बेटियों की।
फिर भी संसद में बेशर्म नेता शौर मचा रहा है।।
अस्त व्यस्त हालत है आज मेरे देश की सड़को की हर तरफ।
क्योंकि यहाँ हर सरकारी अधिकारी आराम से रिश्वत पचा रहा है।।
बेशर्मी इस कदर हावी है आज हर एक भारतवासी पर।
गलत काम करके भी बेशर्म,घर के बाहर तिरंगा लगा रहा है।।
भगत शुखदेव और राजगुरु से देशभक्त अब कैसे आएंगे।
तिरंगे का अब जैसा हो रहा अपमान,वो ना सह पाएंगे।।
शहीदों और देशभक्तों से सजा है आज फेसबुक व्हाट्सएप्प का बाजार।
देखो आज का देशभक्त,मोबाइल पर देश की रक्षा में लहू बहा रहा है।।
नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद (उ. प्र)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।