डॉ कुमार विश्वास : हिन्दी की प्रसिद्धि से दीवानी कविता तक

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रश्मिरथी

डॉ कुमार विश्वास : हिन्दी की प्रसिद्धि से दीवानी कविता तक

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 डॉ अर्पण जैन ‘अविचल

यशस्वी सूर्य अम्बर चढ़ रहा है, तुमको सूचित हो
विजय का रथ सुपथ पर बढ़ रहा है, तुमको सूचित हो
अवाचित पत्र मेरे जो नहीं खोले तलक तुमने
समूचा विश्व उनको पढ़ रहा है, तुमको सूचित हो

नवल हो कर पुराना जा रहा है, तुमको सूचित हो
पुनः यौवन सुहाना आ रहा है, तुमको सूचित हो
जिन्हें सुन कर कभी तुमने कहा था- मौन हो जाओ
वो धुन सारा ज़माना गा रहा है, तुमको सूचित हो…!!!

डॉ कुमार विश्वास

10 फ़रवरी 1970 दिवस बसंत पंचमी को को पिलखुआ, (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में पिता डॉ चन्द्रपाल जी शर्मा और माता श्रीमती रमा जी के घर हिन्दी कविता के सुकुमार का जन्म हुआ। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय विद्यालय, पिलखुआ से प्राप्त की। उनके पिता डॉ॰ चन्द्रपाल शर्मा, आर एस एस डिग्री कॉलेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डॉ॰. कुमार विश्वास का मन तो मशीनों की पढ़ाई में नहीं लगा और उन्होंने बीच में ही वह पढ़ाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्पश्चात उन्होंने “कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना” विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया।

डॉ॰ कुमार विश्वास ने अपना करियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 में शुरू किया। तत्पश्चात वो अब तक महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही डॉ॰ विश्वास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से हैं। उन्होंने अब तक हज़ारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं। डॉ॰ विश्वास मंच के कवि होने के साथ साथ हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के गीतकार भी हैं। उन्होंने आदित्य दत्त की फ़िल्म ‘चाय-गरम’ में अभिनय भी किया है।

शृंगार रस के सुकुमार कवि कुमार विश्वास ने हिन्दी की कविता को भारत के युवा वर्ग के बीच विशेष स्थान दिलवाया और बतौर हिंदी साधक कुमार वर्तमान दौर के हिंदी के अग्रणी कवितों में शामिल है। आपका विवाह  डॉ. मंजू शर्मा (व्याख्याता) से हुआ , आपकी दो बेटियाँ अग्रता विश्वास और कुहू विश्वास है।

कुमार विश्वास अगस्त २०११ के दौरान जनलोकपाल आंदोलन के लिए गठित टीम अन्ना के एक सक्रिय सदस्य रहे हैं। वे २६ नवम्बर २०१२ को गठित आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे हैं। डॉ॰ कुमार विश्‍वास अमेठी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा। वो एक ऐसे छवि वाले कवि रहे हैं जिसने राजनीति को युगधर्म के अलावा कुछ नहीं समझा। कई राजनीतिक पार्टी उनकों अपने खेमें में लाना चाहते हैं पर वो अडिग रहे हैं।

विभिन्न पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपने के अलावा डॉ॰ कुमार विश्वास की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- ‘इक पगली लड़की के बिन’ (1996) और ‘कोई दीवाना कहता है’ (2007 और 2010 दो संस्करण में)। विख्यात लेखक स्वर्गीय धर्मवीर भारती ने डॉ॰ विश्वास को इस पीढ़ी का सबसे ज़्यादा सम्भावनाओं वाला कवि कहा है। प्रथम श्रेणी के हिन्दी गीतकार ‘नीरज’ जी ने उन्हें ‘निशा-नियामक’ की संज्ञा दी है। मशहूर हास्य कवि डॉ॰ सुरेन्द्र शर्मा ने उन्हें इस पीढ़ी का एकमात्र आई एस ओ:2006 कवि कहा है। कुमार विश्वास ने 2018 हिंदी फिल्म परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण के लिए एक गीत दिल दे जगह लिखा था।

डॉ॰ कुंवर बेचैन काव्य-सम्मान एवम पुरस्कार समिति द्वारा 1994 में ‘काव्य-कुमार पुरस्कार’, साहित्य भारती, उन्नाव द्वारा 2004 में ‘डॉ॰ सुमन अलंकरण’, हिन्दी-उर्दू अवार्ड अकादमी द्वारा 2006 में ‘साहित्य-श्री’, डॉ॰ उर्मिलेश जन चेतना मंच द्वारा 2010 में ‘डॉ॰ उर्मिलेश गीत-श्री’ सम्मान प्राप्त कुमार विश्वास कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी एक अग्रणी कवि हैं। वो अब तक हज़ारों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ और संचालन कर चुके हैं। देश के सैकड़ों प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में उनके एकल कार्यक्रम होते रहे हैं। भारत के सैकड़ों छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। हिन्दी भाषा के सौंदर्य का जन सामान्य से परिचय करवाने वाले लोकप्रिय कवियों में कुमार विश्वास का योगदान अतुलनीय है।

dr-kumar-vishwas-640x330डॉ कुमार विश्वास
रस -शृंगार रस
अनुभव – ३ दशकों से अधिक
निवास- गाज़ियाबाद (उत्तरप्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।