टमाटर से भारी जिन्‍दगी

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sunil jain

 देसी के साथ जब से विदेशी टमाटर आया है,देसी कुछ ज्‍यादा ही भाव खा रहा है। विदेशी के भाव तीसरी मंजिल पर तो,देसी के भाव आसमान पर। देसी खाकर कोई लाल हो रहा है,तो कोई उसके भाव सुनकर लाल हुआ जा रहा है। जो खरीद रहा है वो लाल है,जो नहीं खा पा रहा है,वह मारे शर्म के लाल है। किसी के टमाटर खा के गाल लाल हो रहे हैं,और कुछ की टमाटर खरीद कर जेब का हाल बेहाल है। जो टमाटर नहीं खरीद पा रहा है,वह बैंगन की तरह काला या फिर कददू की तरह मुंह बनाकर सब्‍जी मंडी से निकल रहा है।

    गलियों में टमाटर के ठेले नजर नहीं आ रहे हैं। ठेले में टमाटर दुबका पड़ा है,कहीं कोई गरीब देख न ले,अमीर खोजी कुत्‍ते की तरह सूंघ रहा है। हर कोई ढूंढ रहा-किस ठेले पर टमाटर बिक रहा है,आयकर वाले भिखारी के भेष में मंडी में घूम रहे हैं। टमाटर जिसने खरीदा,बस चल भाई अंदर।
आज के समाचार शीर्षक-टमाटर खरीदते हुए पांच पकड़े गए, तीन जेल में,दो अस्‍पताल में। एक की हालत गम्‍भीर,दो को सरकारी मुआवजे की उम्‍मीद। आज रात देखिए `लाल टमाटर से ब्‍लैक मनी का ऐतिहासिक सफर।` स्विस बैंक तक पहुंच है,इस ललुए टमाटर की,गोरी के गाल पर,अफसर की कुर्सी में,बाबू की चोर जेब में,सेठ की तिजोरी में,राजनीति की चाल में। अब सुना है दलबदल करने वाले नेताओं को पांच किलो टमाटर मुफ्त और सालभर तक ढाई सौ ग्राम देसी टमाटर रसोई में मुफ्त।
कई टमाटर शरीफ की तरह मंडी से गायब,तो कोई पुलिस से बच रहा है तो कोई नाली में सड़ रहा है। पुलिस भी टमाटरों के पीछे पड़ी है। पुलिस की मार भी फीकी है,टमाटर की मार के आगे। पुलिस के साहब का आदेश-टमाटर का ठेला दिखे तो धारा कोई सी भी लगाओ,लेकिन उसे में थाने लाओ। टमाटर फेसबुक पर सबसे ज्‍यादा पसंद पा रहा है,हजारों की संख्‍या में उसे साझा कर रहे हैं, वाटसएप पर नए-नए तरीके से टमाटर की तुलना योद्धाओं से की जा रही है। टमाटर पर चुटकुले पर जोर आ रहे हैं। संता-बंता से ज्‍यादा लोकप्रिय हो गया टमाटर।
टमाटर के भाव देख मण्‍डी की सब्जियां शर्म से मरी जा रही हैं और यही जबान पर आ रहा है,हाय हम न हुए। सर्वव्‍यापी आलू का हाल बेहाल है,लोगों को करेला मीठा लगने लगा,भिण्‍डी कोने पड़ी, लौकी और तुरई की हालत निर्दलीय विधायकों से भी गई गुजरी थी। टमाटर मुख्‍यमंत्री बना पड़ा था,लेकिन प्‍याज जब टमाटर के पास से निकली तो इतराकर बोली-ए तेरी औकात क्‍या है,अभी दो दिन में गली-गली में भैंसे खाते दिखाई देंगे,अगर हिम्‍मत है तो सरकार बदल कर दिखा।
टमाटर का मुंह लटक,भाव अधर में अटक गया। प्‍याज के कथन के बाद टमाटर ४५ रुपए प्रति किलो पर आ गया। उसके चेहरे पर बाबू के चेहरे की थकान,बेटी के बाप की लाचारी,गरीब की गरीबी आ गई और उसका चेहरे का भाव शून्‍य हो गया।
                                                                     #सुनील जैन राही
परिचय : सुनील जैन `राही` का जन्म स्थान पाढ़म (जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद ) है| आप हिन्दी,मराठी,गुजराती (कार्यसाधक ज्ञान) भाषा जानते हैंl आपने बी.कामॅ. की शिक्षा मध्यप्रदेश के खरगोन से तथा एम.ए.(हिन्दी)मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया हैl  पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन देखें तो,व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी आपके नाम हैl कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में आपकी लेखनी का प्रकाशन होने के साथ ही आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हुआ हैl आपने बाबा साहेब आंबेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया हैl मराठी के दो धारावाहिकों सहित 12 आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैंl रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 45 से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैंl कई अखबार में नियमित व्यंग्य लेखन जारी हैl 

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।