घरेलू नुस्खे

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babulal sharma
१.
हरड़े  भरड़े  आँवले, लो तीनो  सम  तोल।
कूट पीस कर छानिए,त्रिफला है अनमोल।।
२.
पाँच भाँति के नमक से,करो चूर्ण तैयार।
दस्तावर  है  औषधि, कहते  पंचसकार।।
३.
ताजे माखन में सखी, केसर  लेओ घोल।
मुख व होठों पर लगा,रंग गुलाब अमोल।।
४.
सूखी  मेंथी  लीजिए, खाएँ मन  अनुसार।
किसी तरह पहुँचे उदर,मेटे बहुत विकार।।
५.
ठंड  जुकाम  भारी लगे, नाक बंद  हो जाय।
अजवायन को सेंक कर, सूंघे तो खुल जाय।।
६.
चर्म रोग में  पीसिए, अजवायन  को  खूब।
लेप लगाओ साथिया,मिलता लाभ बखूब।।
७.
फोड़े फुंसी होय तो, अजवायन ले आय।
नींबू रस में पीस कर,औषध मान लगाय।।
८.
अजवाइन गुड़ घी मिला,हल्का गर्म कराय।
वात पित्त  कफ संतुलन,  सर्दी में हो जाय।।
९.
भारी सर्दी  पोष की, करती बेदम  हाल।
अदरक नींबू शहद को,पीना संग उबाल।।
१०.
मेंथी अजवायन उभय,हरती उदर विकार।
पाचन होता संतुलित, खाएँ किसी प्रकार।।
११.
अदरक  के रस में शहद, लेना  सखे  मिलाय।
पखवाड़े नियमित रखो,श्वाँस कास मिटजाय।
१२.
मक्का की रोटी भली,खूब लगाओ भोग।
पाचन के संग लाभ दे,क्षय में रखे निरोग।।
१३.
छाछ दही घी दूध ये, शुद्ध हमारा भोज।
गाय पाल सेवा करो ,मेवा  पाओ  रोज।।
१४.
गाजर रस मय आँवला,पीना पूरे मास।
रक्त बने भरपूर तो,नयनन भरे उजास।।
१५.
बथुआ केंहि विधि खाइए,मिले लाभ भरपूर।
पाचन   भी   अच्छा  करे, रहे   बुढ़ापा  दूर।।
१६.
चौंलाई में  गुण बहुत, रक्त बढ़े  भरपूर।
हरी सब्जियों से रहे,मानुष तन मन नूर।।
१७.
पालक मेथी मूलियाँ,स्वास्थ्य रक्त दातार।
हरी सब्जियां नित्य लो,रहलो सदाबहार।।
१८.
जूस करेला पीजिए, प्रतिदिन बारहो मास।
मधुहारे तुमसे सदा, हो सुखिया  आभास।।
१९.
दातुन करिए नीम की,होय न दंत विकार।
नीम स्वयं ही वैद्य है, समझो सही प्रकार।।
२०.
जामुन की दातुन करो, गुठली  लेय चबाय।
मधुमेही  को लाभ हो ,प्रदर  प्रमेह  नशाय।।
२१.
दातुन करो बबूल की,हिलते कभी न दंत।
तन मन शीतलता रहे, शूल  बचाओ पंत।।
२२.
कच्ची पत्ती नीम की ,प्रातः  नित्य  चबाय।
रक्त साफ करके सखे,यह मधुमेह मिटाय।।
२३.
सदाबहारी  फूल  जो, प्रात चबालो आप।
दूर करे मधुमेह  को, खाओ मधु को माप।।
२४.
तुलसी  पत्ते औषधी, पीना सदा  उबाल।
कितनी भी सर्दी पड़े,होय न बाँका बाल।।
२५.
चूर्ण  बना  कर  आँवले, खाओ बारह मास।
नहीं जरूरत वैद्य की,जब तक तन में श्वाँस।
२६.
संध्या भोजन बाद में, थोड़ा सा गुड़ खाय।
पाचन भी अच्छा रहे, बुरी डकार न आय।।
२७.
लहसुन डालो तेल में,अजवायन अरु हींग।
जोड़ो  में  मलते  रहो , नहीं  चुभेंगे  सींग।।
२८.
सब्जी में खाओ लहसुन, हरता कई विकार।
नेमी  धर्मी   डर   रहे,  खाएँ  खूब विचार।।
२९.
कैसे भी  खा  लीजीए ,करे सदा ही लाभ।
ग्वार पाठा बल खूब दे,आए तन में आभ।।
३०.
दाल चीनि जल घोल कर,पीजिए दोनो वक्त।
पेचिस  में आराम  हो, मल हो  जाए सख्त।।
३१.
दालचीनि  मुख राखिए, जैसे पान सुबास।
मुख कभी न आएगी, गन्दी श्वाँस कुबास।।
३२.
दूध पियो नित ही भला,हल्का मीठा डाल।
ग्रीष्म ऋतु में पीजिए,संगत मिला रसाल।।
३३.
ग्वारपाठ  रस आँवला ,करे पित्त को नष्ट।
नित्य निहारा पीजीए,स्वास्थ्य रहेगा पुष्ट।।
३४.
तीन भाग रस आँवला,एक भाग मधु साथ।
प्रातः  सायं  पीजिए, नेत्र  नए   हो   जात।।
३५.
हल्दी  डालें   दूध   में, छोटी  चम्मच  एक।
कफ खाँसी के शूल मिट,स्वस्थ रहोगे नेक।।
३६.
हल्दी  चम्मच  एक भर, पीवे छाछ मिलाय।
खुजली फुन्शी दाद भी,जल्दी से मिटजाय।।
३७.
बेसन नींबू नीर मधु, सबको लेय मिलाय।
चेहरे पर लेपन करो,सुन्दरता बढ़ि जाय।।
३८.
शहद मिला कर दूध पी,जीवन रहे निरोग।
दीर्घायु  होकर  करो, जीवन के सुखभोग।।
३९.
भोजन के संग छाछ तो,होती अमरित मान।
स्वस्थ  पुष्ट  तन मन  रहे, बनी रहेगी  शान।।
४०.
सौ रोगों की औषधी, देखी परखी मान।
पिए गुनगुना नीर तो,बनी रहे तन जान।।
४१.
दिन के भोजन में रखो, दही कटोरी  एक।
पाचक रस निर्माण कर,मेटे व्याधि अनेक।।
४२.
अजवायन की भाप से,मिटे शीत के रोग।
गर्म भाप  को सूँघिए ,रहना शीत निरोग।।
४३.
लो अजवायन छाछ से,पेट रहे तन्दरुस्त।
कीड़े  मरते पेट  के, भोजन  करना मस्त।।
४४.
सौंफ हींग सेंधा नमक, पीपल  उसमे डाल।
जीरा छाछ मिला य पी, रहे न उदर मलाल।।
४५.
भूतों को सावन पिला, कार्तिक पिला सपूत।
ग्रीष्मकाल में सब पियो,उत्तम छाछ अकूत।।
४६.
शर्मा बाबू लाल के, नुस्खे  सब  आदर्श।
सोच समझ लेना मगर,करो वैद्य से मर्श।।

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।