कहावतें यूँही नही बनती…..

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preeti surana
सुनो !
मैंने सुना है
क्रिसमस की रात
सैंटा क्लॉज आता है
अपनी लाल झोली में ढेर सारी खुशियां लेकर
सब एक चिट्ठी में
अपनी ख्वाहिश लिखकर
अपने तकिये के नीचे  रखकर,..
खिड़की खुली करके सो जाते है,..
तब रात में सैंटा क्लॉज
चुपके से आकर
वो ख्वाहिश
पूरी करके चला जाता है,..
मैंने भी इस बार कुछ लिख रखा था
सैंटा क्लॉज के लिये
पर बदकिस्मती से
खि़ड़की खोलना भूल गई,..
खैर जाने दो,..
जो मैंने लिखा था वो मुझे मिलना ही नही था,.
शायद इसीलिये मुझसे ये भूल हुई हो,.. ??
और मैंने दोष मढ़ा किस्मत पर,..
मैने मांगा था
कि सैंटा क्लॉज
दुनिया को
मुस्कुराहटों और खुशियों से भऱ दो,..
उसे ये करने के लिए दुनिया से
भूख,बीमारी,बेईमानी,बदनसीबी
और इन सब से  भी बडी़ चीज
“बेबसी” को साथ ले जाना पड़ता,..
आखिर छोटी सी झोली में ये सब कंहा समा पाते,..
इसीलिए
ईश्वर ने जानबूझकर मुझसे ये भूल करवाई,.
ताकि लोग ये न कहने लगे कि सैंटा क्लॉज की कहानी झूठी है,..
“समय से पहले और किस्मत के बिना कभी किसी को कुछ नहीं मिलता”
कहावतें यूँही नही बनती,…
#प्रीति सुराना
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।