*कशिश’ पुस्तक का विमोचन हुआ*

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इंदौर ।

हिंदी और उर्दू के बेहतरीन संगम और चुनिंदा नज़्मों को इंदौर के लेखक डॉ.वासीफ काज़ी ने पुस्तक ‘कशिश’ के रूप में सृजन किया,संस्मय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक कशिश का विमोचन शुक्रवार को इंदौर एबी रोड़ स्थित डीक्यू कैफे में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अर्पण जैन व व साहित्यकारों के बीच हुआ।
कशिश में एक अनोखी कशिश है, जो स्वतः ही पाठकों को खिंचती है।उक्त बात डॉ अर्पण जैन ने कही।
कवि व साहित्यकार डॉ. वासिफ़ काजी इंदौर में एक निजी महाविद्यालय में प्राध्यापक है ।
इनकी साहित्य में बचपन से ही रूचि रही है, और अध्यापन कार्यों से जुड़े होने से लगातार कई पत्र पत्रिकाओं, मातृभाषा.कॉम आदि पर इनकी रचना प्रकाशित होती रहती है । अब तक डॉ काज़ी की चार किताबें आ चुकी है, यह पांचवी किताब पाठकों के बीच है।
पुस्तक के विमोचन पर हिन्दीग्राम के संस्थापक डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’, संस्मय की निदेशिका शिखा जैन, अमन काज़ी, मृदुल जोशी आदि ने डॉ. काजी को बधाईयाँ दी ।

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।