कलयुगी बन जाइये

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ajay ahsas

घोर कलयुग है भइये, समय के साथ चलिए
कुछ बनों या ना बनों पर कलयुगी बन जाइये।।
सारा हुनर कारीगरी, चालाकियां और होशियारी
आपका अपना है सब, जब चाहें तब अपनाइये
जब दूसरे की बात हो , मासूम सा बन जाइये
कुछ बनों या ना बनों पर ,कलयुगी बन जाइये।।
खुद न बंधना नियम से, बस दूसरों पर थोपिये
तलवार नियमों की चले, जो मानें उसको भोकिये
खुद पर जो लागू भी न हो, कानून ऐसे बनाइये
कुछ बनों या ना बनों पर, कलयुगी बन जाइये।।
बात ना कभी काटिए, सुन लीजिए खामोश हो
कमियां बताओ सभी की, चाहें तुम्हारा दोष हो
आपस में सब लड़ते रहे, बस नीति ये अपनाइये
कुछ बनों या ना बनों पर कलयुगी बन जाइये।।
पेमेन्ट कम हो काम हो, सम्मान हो और नाम हो
बस काम अपना निकालिए, सन्नाम या बदनाम हो
काम सब बन जाये, थोड़ी चापलूसी लाइये
कुछ बनों या ना बनों पर कलयुगी बन जाइये।।
वक्त की करवट को समझें, आप अब हैं नही बच्चे
देखकर मुंह बात करके, आप भी बन जाये अच्छेे
गले मिलकर पीठ पीछे, छूरियां चलाइये
कुछ बनों या ना बनों पर कलयुगी बन जाइये।।
जो किया एहसास मैने, आपको सब बता दिया
जो न कर पाया अभी तक, आपको वो सुझा दिया
बात मेरी मानिए, इसको अमल में लाइये
कुछ बनों या ना बनों पर कलयुगी बन जाइये।।

#अजय एहसास

परिचय : देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सुलेमपुर परसावां (जिला आम्बेडकर नगर) में अजय एहसास रहते हैं। आपका कार्यस्थल आम्बेडकर नगर ही है। निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ हिन्दी भाषा के विकास एवं हिन्दी साहित्य के प्रति आप समर्पित हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।