कटु मत बोलिए

Read Time0Seconds
satish
शब्दों के साधक अगर, रहे साध कर मौन।
कमजोरों की वेदना, कहो कहेगा कौन॥
कोई भी सत्ता रहे, कोई पक्ष विपक्ष।
कविता तो हर बात को, कहती है निष्पक्ष॥
यादों में ज़िन्दा रहे, केवल वे जन शेष।
जीवन में जो कर गए, कोई काम विशेष॥
निष्ठा से पालन करें, यदि अपना कर्तव्य।
जीवन का प्रासाद फिर, निश्चित होगा भव्य॥
जो समझे हैं ठीक से, जीवन का भावार्थ।
वे जन निष्ठा भाव से, करते हैं पुरुषार्थ॥
जग में यश पाते सदा, केवल वही सुधीर।
सेवा से  हरते  रहे, जो औरों  की  पीर॥
कभी चीरते तीर से, कभी मधुर संगीत।
शब्द बढ़ाते शत्रुता, शब्द  बनाते  मीत॥
कटु वाणी करती सदा, राहों को अवरुद्ध।
शब्दों के परिणाम हैं, जानें कितने युद्ध॥
कटु शब्दों की मार को, माप सका है कौन।
‘बंसल’ कटु मत बोलिए, चाहे साधो मौन॥
                                                             #सतीश बंसल
परिचय : सतीश बंसल देहरादून (उत्तराखंड) से हैं। आपकी जन्म तिथि २ सितम्बर १९६८ है।प्रकाशित पुस्तकों में ‘गुनगुनाने लगीं खामोशियाँ (कविता संग्रह)’,’कवि नहीं हूँ मैं(क.सं.)’,’चलो गुनगुनाएं (गीत संग्रह)’ तथा ‘संस्कार के दीप( दोहा संग्रह)’आदि हैं। विभिन्न विधाओं में ७ पुस्तकें प्रकाशन प्रक्रिया में हैं। आपको साहित्य सागर सम्मान २०१६ सहारनपुर तथा रचनाकार सम्मान २०१५ आदि मिले हैं। देहरादून के पंडितवाडी में रहने वाले श्री बंसल की शिक्षा स्नातक है। निजी संस्थान में आप प्रबंधक के रुप में कार्यरत हैं।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

दिल परेशान

Fri Aug 25 , 2017
किसकी तलाश में ये दिल परेशान है, इस अजनबी शहर में हर आदमी अनजान है l दिल के टूटने की वजह मत पूछ ऐ दोस्त, पत्थरों के शहर में अपना शीशे का मकान है l जो छोड़ गया मुझे मेरा मुस्तकबिल बताकर, वो शख्स इस शहर में आज भी गुमनाम […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।