एक कप चाय – उसके फायदे और नुकसान

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gulab

चाय एक सर्व मान्य और सरल पदार्थ हे, रोजाना सुबह मे एक कप चाय और साथ में ब्रेक फास्ट भी होता है, कही लोगो को चाय इतना पसंद हे कि दिन में दश दश कप चाय पी जानेका साहस करते हैं, लोग कहते हैं कि चाय व्‍यसन की व्याख्या मे नही आता है, मेरी समझ हे कि चाय व्यसन मे गिना जाता है, लेकिन कब, जब कोई व्यक्ति एक कप के बजाय दश दश कप चाय अगर पी जाता है तो वह व्यक्ति को चाय का व्यसन हे, और कोई व्यक्ति यदि एक कप चाय पीटा है लेकिन चाय बिना वो बेचेन हो जाता है या उसे चाय के बिना शिर दुखता है तो वह व्यक्ति चाय की व्‍यसन नी हे एसा कह सकते हैं
“शायद मेरी शादी का ख्याल दिल में आया है, उसी लिए मम्मी ने तेरी मुजे चाय पे बुलाया हे” ये मधुर गीत की धुन जब सुनते हैं तब दिल आनद से ज़ूम उठता है, एक कप चाय मे कितनी शक्ति हे, एक कप चाय राजकीय व्यक्ति को भी मदद करता है, चाय पे चर्चा के नाम से लोगो को इकठ्ठा किया जाता है और वहा राज कारण की बाते होती है, इसी बहाने लोग एक दूसरे से मिलते हैं और अगर इलेक्शन हो तो इसी की बात होती है, एक कप चाय पीला कर अपनापन जताने की कोशिश की जाती है, एक कप चाय से रिसता मजबूत बनता है, एक कप चाय मे मित्रता बन जाती है,
किसी व्यक्ति को बीमार होनेपर जब हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाता है और वह व्यक्ति का ऑपरेशन किया जाता है, तब डॉक्टर सलाह देते हैं कि उसे 12 घंटे बाद चाय बिस्किट दीजिए,
आसाम में और दार्जिलिंग मे चाय के बगीचे हे, ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना अंग्रेजो ने कोलकाता में की थी और बाद में चाय के व्यापार के बहाने पूरे भारत देश में अपना अधिकार फैलाया था, पूरे देश में उन्होने व्यापार केंद्र बनाए थे और देश का शासन अपने हिस्से लेकर देश को गुलामी की जंजीरों में जकड़ लिया था
हमारे देश के प्रधान मंत्री मननीय श्री नरेंद्र मोदीजी चाय बेचते थे और आज देश के उच्च पद पर कार्यरत हैं, चाय भारतीय समाज का अभिन्न अंग है, 90 प्रतिशत लोग सुबह मे चाय पीते हैं, बिना चाय पिए एसा लगता है कि दिन की शुरुआत ही नहीं हुई है

चाय पत्ती के फायदे :

1. आम तौर पर ग्रीन टी ब्यूटी प्रॉडक्ट्स के रूप में माना जाता है, लेकिन चाय की पत्ती चाहे जो भी हो उसका उपयोग खूब सुरती निखारने के लिए किया जाता है, आप चाहे तो इस ब्यूटी प्रॉडक्ट्स के लिए चाय की पत्ती का इस्तेमाल कर सकते हैं,
2. अगर आप के बाल सूखे हो गए तो बाल मे चमक लाने के लिए भी ग्रीन टी या फिर ब्लैक टी इस्तेमाल कर सकते हैं, एक बर्तन में पानी उबालकर ठंडे होने के लिए रखकर ठंडा होने के बाद बालो मे शेम्पू करने के बाद बालो मे વો पानी लगाने से एक ही बार में केसा फर्क दिखता है वो आप की नजर में आएगा,
3. सन बर्न सेसुरक्षा के लिए ये लाभदाई हे, सन स्क्रीन इस्तेमाल करने के बावजूद आप को सन बर्न की प्रॉब्लम है तो उसे दूर करने के लिए एक बार ही टी बैग का इस्तेमाल करे, कुछ टी बैग्स लेकर उन्हे हाथो से ठंडे पानी में डुबोकर, फिर हल्के हाथों से दबाकर उस ठंडे पानी में से उसे निकालकर चेहरे पर रखकर कुछ देर लेट जाए, इससे आपकी सन बर्न की प्रॉब्लम दूर हो जाएगी,
4. अन्य कोई किट या पतंगा काट ले तो चाय की पत्ती ओ की फॉर्मूला है, अगर किसी भी कीट काटने पर टि बैग्स से जल्दी से फायदा होगा,
5. डार्क सर्कल दूर करने के लिए, अगर आप की आंखो के नीचे काले घेरे हो या फिर आपकी आँखे पफी पफी रहती है तो भी ठंडे टी बैग्स का इस्तेमाल करना आप के लिए फायदा कारक है
6. पैरो की बदबू दूर करने के लिए चाय पत्ति के पानी में थोड़ी देर डुबोकर रखे, बदबू दूर हो जायेगी,
7. इसके अलावा पत्तियों का इस्तेमाल मोच ह्यूराइज करने के लिए, आफ्टर सेव के लिए भी किया जाता है, बालोका रंग बरकारार रखने के लिए भी किया जाता है
8.चाय मे एंटि एक्सिडेंट होता है और घावों में भम्भेर ने के लिए भी किया जा सकता है, उसके पहले चाय को उबालकर उसे सुखाकर चोट पर लगाया जाता है या चाय पत्ती के पानी से चोट या घाव को धोया जा सकता है, यह संक्रमण के भी काम मे आता है
9. चाय पत्ती का इस्तेमाल लकड़ी के बने सामान को चमकदार बनाने के लिए भी किया जाता है, चाय बनाने के बाद बची हुई चाय को दुबारा उबालकर उस पानी को शीशे में भर कर रखे, वो लकड़ी से बने सामान को लगाने से शानदार बनता है
10. चाय पत्ती का उपयोग काबुली चने बनाने मे भी किया जाता है, उबले हुए पानी में चाय पत्ती डालकर उसमे काबुली चने डालने से काबुली चने कलर से चमकदार बनते हैं!
चाय पीने से शरीर में स्फूर्ति आती है, चाय से कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम होती है,

चाय से होता नुक्सान :

1।सुबह मे खाली पेट चाय पीने से सेहत को बहुत नुकसान होता है, खाली पेट चाय पीने से एसिड की मात्रा शरीर में बढ़ती है,
2।ख़ाली पेट चाय पीने से पेट पर प्रभाव पड़ता है और एसिड बढ़ने से कई लोग सुबह की चाय पीना पसंद नहीं करते हैं
3. चाय पीने से शरीर में पेशाब में यूरिक अतिशय बढ़ता है, जोडॉ में सूजन बढ़ता है,
4.शरीर में रक्त की कमी आती है
5. गरम चाय पीने से एसिडिटी भी होती है
6. गर्भावस्था के दौरान ग्रीन टी नुक्सान कारक नहीं होती है लेकिन उसकी साइड इफेक्ट ज्यादा होती है, चाय मे केफिन की मात्रा होती है जो बच्चे को नुकसान पहुंचाती है,
7.गर्भवस्था में अदरक वाली चाय पीने से गर्भपात भी हो सकता है
8. बेड टी आपके शरीर में एसिड का लेवल बढ़ाती है, वो मुह के sw को प्रभावित करता है
9.टॉक्सिन का लेवल भी बढ़ता है
10. खाने के बाद चाय पीने से   प्रोटीन और आयर्न शरीर ग्रहण नहीं कर पाता, फेनॉलिकस कम्पाउण्ड पाचन क्रिया को बाधित करता है!

#गुलाबचन्द पटेल

परिचय : गांधी नगर निवासी गुलाबचन्द पटेल की पहचान कवि,लेखक और अनुवादक के साथ ही गुजरात में नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता की भी है। हरि कृपा काव्य संग्रह हिन्दी और गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ है तो,’मौत का मुकाबला’ अनुवादित किया है। आपकी कहानियाँ अनुवादित होने के साथ ही प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन(प्रयाग)की ओर से हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मुंबई,नागपुर और शिलांग में आलेख प्रस्तुत किया है। आपने शिक्षा का माध्यम मातृभाषा एवं राष्ट्रीय विकास में हिन्दी साहित्य की भूमिका विषय पर आलेख भी प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय(दिल्ली)द्वारा आयोजित हिन्दी नव लेखक शिविरों में दार्जिलिंग,पुणे,केरल,हरिद्वार और हैदराबाद में हिस्सा लिया है। हिन्दी के साथ ही आपका गुजराती लेखन भी जारी है। नशा मुक्ति अभियान के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी दवारा भी आपको सम्मानित किया जा चुका है तो,गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल ने ‘धरती रत्न’ सम्मान दिया है। गुजराती में‘चलो व्‍यसन मुक्‍त स्कूल एवं कॉलेज का निर्माण करें’ सहित व्‍यसन मुक्ति के लिए काफी लिखा है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।