आज फिर जीने की तम्मना है

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garima sinh
कोई धुन खुशी का बजाकर तो देखो,
कभी बेवजह मुस्कुरा कर तो देखो,
ये दुनियाँ तुम्हारे कदम चुम लेगी
कदम एक आगे बढ़ाकर तो देखो!!
कोई धुन खुशी का…………
ये नदियों का कल,कल, हवाओं का सन, सन
तुम्हे भी कोई गीत लगने लगेगा
कोई प्रेम का गीत गाकर तो देखो!!
कोई धुन खुशी का…….
यूँ फूलों का बगियाँ में खिलकर के हँसना,
ये बादल का बिन मौसम बरसना,
नज़ारे तुम्हें भी यूं रंगी लगेंगे,
मोहब्ब का रंग दिल पर चढ़ा कर तो देखो !!
कोई धुन खुशी का……….
ये तितली का फूलों पे मड़राते रहना,
ये भैरों का कालियों का गुण गाते रहना,
तेरे दिल का आँगन महकने लगेगा
कोई ख्वाब सुंदर सजाकर तो देखो!!
कोई धुन खुशी का ……
मिले पल खुशी का तो जी भर के जीना,
नही दर्द के घुट पल ,पल तू पीना
फ़िज़ा खूबसूरत तुम्हें भी लगेगी
कभी दिल किसी से लगाकर तो देखो
कोई धुन खुशी का बजाकर तो देखो,
कभी बेवजह मुस्कुरा कर तो देखो!!
#गरिमा सिंह
परिचय- 
नाम-  गरिमा अनिरुद्ध सिंह
साहित्यिक उपनाम-मधुरिमा
राज्य-गुजरात
शहर-सूरत
शिक्षा- एम ए प्राचीन इतिहास
कार्यक्षेत्र-शिक्षण
विधा – हास्य ,वीर रस ,शृंगार
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।