अबकी गेहूं मा रोइ दिहिन।

Read Time0Seconds
ajay ahsas

कुलि हमसे विधाता छीन लिहिन, अबकी गेहूं मा रोइ दिहिन।

ई जाने कवन बयार चली, एकै झोंका मां खतम कीन
गेहूं मा फूल लगा जइसे, जइसे वहिमा बाली आइल
करिया करिया करिया होइगै, दुख कै बदरा जब मडराइल
बिजुरी चमकी गरजा बदरा, आंखी कै सब बहिगै कजरा।
अंसुवन कै धार रुकै नाही, दइवो नाही जानी मजरा
बरखा रिमझिम रिमझिम भा शुरू, अउ हवा पुरबिया डोलि गइल।
जउन फसल खड़ी रही हिम्मत से, आंधी पानी पा लोटि गइल
ई दशा देखि सब चकरावा, मन ही मन भा खुब पछतावा
फसल देखि अइसन लागे, की गइल हो जइसे लतियावा
हे इन्द्र देव तनी ध्यान करी, ई चइत महीना दिहा तरी।
कइला अइसन तू हे भगवन कि पेट पीठ दूनौ ही जरी
कुछ बचा जवन वै पानी से, जरिगा खम्भा के आगी से।
पी के अखियन के आंसू का, हम दूर भा रोटी सागी से
भूखी से रोवैला लइका, भाई रोटी कहिकै छोटका।
हमरौ मनवा मा कष्ट भइल, जब फांसी पे कलुआ लटका
तावा केहू कै जरै नहीं, देखें का रोटी मिलै नहीं
सूखल जाता सबके शरीर, चेहरा केहू कै खिलै नहीं।
सरकारी पिट्ठू आवैले, कागज पे कलम चलावैले
एक बिगहा सत्यानाश भइल, सौ रुपिया कै चेक देखावैले।
सरकारी नौकर कोसैले, कुतवा अस हमका नोचैले
छः छः लइका कै बात करै, तिरिया दिलवा मां कोचैले।
हम हाय विधाता करी काव, कुछ समझ मां नाही आवत बा
खेती ता अपने राह गइल ,सरकारौ आंख देखावत बा
हम कइसै सम्हारी किसानी का, अखियां से बहै वाले पानी का
एहसास करावा से भगवन!, कुर्सी वाले अभिमानी का।।

#अजय एहसास

परिचय : देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सुलेमपुर परसावां (जिला आम्बेडकर नगर) में अजय एहसास रहते हैं। आपका कार्यस्थल आम्बेडकर नगर ही है। निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ हिन्दी भाषा के विकास एवं हिन्दी साहित्य के प्रति आप समर्पित हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

दायित्व बोध

Fri Apr 26 , 2019
दिवंगतों की मुक्ति का परमधाम है गया पूर्वजो के प्रति श्रद्धा का अनूठा स्थान है गया अतृप्त आत्माओ को तृप्ति दिलाती है गया भटकती आत्माओ को शांति दिलाती है गया पितरो के प्रति आस्था का विष्णु स्थान है गया नई पीढ़ी के लिए पूर्वजो के प्रति दायित्व बोध है गया। […]

You May Like

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।