अटल गाथा पूरी नहीं होगी..

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काल के कपाल पर लिखता हूँ… मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ…गीत नया गाता हूँ

कितना भी लिखें… कितना भी पढ़ें…अटल गाथा पूरी नहीं होगी…जब से यह दुःखद खबर आई… वक्त की सुई ठहर सी गई है…मेरी कलम भी इन स्मृतियों से बाहर निकलना नहीं चाहती…

संसद में अटल जी का वह भाषण…वह निराला अंदाज…बार बार याद आता है जब 13 दिनों की उनकी सरकार गिरी थी।
“आज संख्या बल हमारे साथ नहीं है…मैं अपना इस्तीफा देने जा रहा हूं…”
उनके इस ऐतिहासिक भाषण के ये दो वाक्य हर व्यक्ति को अंदर तक पीड़ा देते हैं कि अच्छा आदमी संख्या बल के आगे हार गया…
लेकिन नियति का खेल देखिये कि उन्हें हराने वाले उनके लिए हृदय में पीड़ा लेकर उन्हें विदाई देने पहुंचे।
अंतिम सफ़र में संख्या बल उनके साथ था…
पहली बार देश दुनिया ने दिल्ली की सड़कों पर ऐसा अद्भुत नजारा देखा… पांच लाख लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंत्रीमण्डल के साथ शव यात्रा में 6 -7 कि.मी. पैदल चलते रहे…
अटल जी जितने बड़े थे उतनी ही बड़ी विदाई उन्हें भारत की सरकार ने दी…यह उनके लिए सर्वथा उचित भी था….भारत के लोगों ने जो प्यार और सम्मान अटल जी के प्रति प्रदर्शित किया है भारत के इतिहास में वैसी मिसाल मिलना कठिन है…
दिल्ली की सड़कों पर जन सैलाब था….लेकिन जो लोग दिल्ली न जा पाये वे खाना पीना छोड़कर टीवी पर अटल जी की अंतिम यात्रा के साथ थे….पूरा देश जैसे ठहर सा गया था…
पहली बार ऐसा भावुक और विहंगम दृश्य लोगों ने अपनी आँखों से देखा… कोई व्यक्ति जन मानस में इतना भी प्रिय हो सकता है…इसे अधिकांश लोगों ने जीवन में पहली बार महसूस किया…
इस अटल गाथा का न आदि है…न अंत…
हम सभी इस मायने में स्वयं को सौभाग्यशाली मान सकते हैं कि हम सब ने उस युग को देखा जिसमें ऐसे महामानव का जन्म हुआ…

अन्तस्तल से नमन…

#डॉ. स्वयंभू शलभ

परिचय : डॉ. स्वयंभू शलभ का निवास बिहार राज्य के रक्सौल शहर में हैl आपकी जन्मतिथि-२ नवम्बर १९६३ तथा जन्म स्थान-रक्सौल (बिहार)है l शिक्षा एमएससी(फिजिक्स) तथा पीएच-डी. है l कार्यक्षेत्र-प्राध्यापक (भौतिक विज्ञान) हैं l शहर-रक्सौल राज्य-बिहार है l सामाजिक क्षेत्र में भारत नेपाल के इस सीमा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कई मुद्दे सरकार के सामने रखे,जिन पर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न मंत्रालयों ने संज्ञान लिया,संबंधित विभागों ने आवश्यक कदम उठाए हैं। आपकी विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल,कहानी,लेख और संस्मरण है। ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं l ‘प्राणों के साज पर’, ‘अंतर्बोध’, ‘श्रृंखला के खंड’ (कविता संग्रह) एवं ‘अनुभूति दंश’ (गजल संग्रह) प्रकाशित तथा ‘डॉ.हरिवंशराय बच्चन के 38 पत्र डॉ. शलभ के नाम’ (पत्र संग्रह) एवं ‘कोई एक आशियां’ (कहानी संग्रह) प्रकाशनाधीन हैं l कुछ पत्रिकाओं का संपादन भी किया है l भूटान में अखिल भारतीय ब्याहुत महासभा के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विज्ञान और साहित्य की उपलब्धियों के लिए सम्मानित किए गए हैं। वार्षिक पत्रिका के प्रधान संपादक के रूप में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए दिसम्बर में जगतगुरु वामाचार्य‘पीठाधीश पुरस्कार’ और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अखिल भारतीय वियाहुत कलवार महासभा द्वारा भी सम्मानित किए गए हैं तो नेपाल में दीर्घ सेवा पदक से भी सम्मानित हुए हैं l साहित्य के प्रभाव से सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-जीवन का अध्ययन है। यह जिंदगी के दर्द,कड़वाहट और विषमताओं को समझने के साथ प्रेम,सौंदर्य और संवेदना है वहां तक पहुंचने का एक जरिया है।

 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।